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Tuesday, 3 October 2017

बिल गेट्स के बारे में 27 रोचक तथ्य

दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति बिल गेट्स को कौन नहीं जानता, वे Microsoft Company के संस्थापक हैं और इतना बड़ा आदमी बनने के बाद भी मात्र 10 डाॅलर की घड़ी पहनते है. ये शख्स पैसो का ही नही दिल का भी अमीर है, आइये जा
नते हैBill Gates in Hindiके रोचक तथ्य।
1. बिल गेट्स का पूरा नाम है विलियम हेनरी गेट्स तृतीय.
2. बिल गेट्स की कहानी फकीर से अमीर वाली नही है। बल्कि, वे पहले से ही अमीर है। उनके पिता विलियम एच. गेट्स नामी वकील थे। गेट्स के परदादा बैंक के मालिक थे। उनके बाद बैंक का कामकाज गेट्स की दादी ने संभाला। दादी ने अरबों की संपति अपने पोते के नाम कर दी थी।
3. Bill gates ने Programing Computer बनाने 13 साल की उम्र में शुरू कर दिए थे।
4. क्या आप को पता है कि बिल गेट्स को Computer Software Programing से इतना प्यार था कि वह पढ़ाई छोड़ कर इस में ही लगे रहते थे जिसकी वजह से वह 11वीं में फेल हो गए थे.
5. कहा जाता है कि बिल गेट्स अपनी हाई स्कूल क्लास में लड़कों से ज्यादा लड़कियां चाहते थे. इसके लिए उन्होंने स्कूल का कंप्यूटर सिस्टम हैक कर लिया था.
6. Bill Gates ने पहला कंप्यूटर प्रोग्राम एक गेम बनाने में इस्तेमाल किया था. इसे “Tic-Tac-Toe” गेम कहते थे. इसमें दो प्लेयर होते थे. एक तो कंप्यूटर और दूसरा एक इंसान.
7. उन्होंने अपना पहला प्रोग्राम केवल 17 वर्ष की आयु में बेचा था जो कि उनके स्कूल के लिए टाइम टेबल का एक सिस्टम था।
8. गेट्स ने भी कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। उन्होंने 1975 में हार्वर्ड युनिवर्सिटी को छोड़ दिया और अपने आप को पूरी तरह से माइक्रोसॉफ्ट के प्रति समर्पित कर दिया। हालांकि 2007 में उसी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डिग्री देकर सम्मानित किया.
9. बिल गेट्स ने अपनी 30 साल की उम्र में यह इच्छा व्यक्त की थी की वह करोडपति बनना चाहते है लेकिन यह बात अलग है की सिर्फ 1 साल के बाद ही वह अरबपति बन चुके थे।
10. बिल गेट्स की पहले एक कंम्पनी थी “Traff-O-Data” जो ऐसे यंत्र बनाती थी जो कि सड़क पर स्थति किसी बिन्दु से गुजरने वाली कारों की गिणती रिकार्ड करते थे।
11. 1997 तक वह तक वह आम आदमी की तरह ही उड़ान भरते थे। अब उनके पास अपनी एक प्लेन है जिसको वह अपनाबड़ा फिजूलखर्चबताते हैं।
12. अपने महंगे प्लेन के अलावा Bill gates के पास कैंची का अविष्कार करने वालेलियोनार्डो दा विंसीके लिखे हुए कोड भी है जो इन्होने साल 1994 में 30.8 मिलियन डॉलर में ख़रीदे थे।
13. बिल गेट्स English के अलावा कोई और भाषा नहीं जानते। उनके जीवन में सबसे बड़ा अफसोस यही है।
 14. बिल गेट्स को 17 की उम्र में लाल बत्ती तोड़ने के जुर्म में जेल की हवा खानी पड़ी थी।
15. कार के शौकिन गेट्स ने माइक्रोसाॅफ्ट की पार्किंग में एक कर्मचारी की कार को ठोकर मार दी। वे कर्मचारी को अपना बिजनेस कार्ड पकड़ाकर चलते बने और कह गए कि डैमेज ठीक कराने के पैसे आकर ले जाएं। इससे “Send the bill to bill” की कहावत फेमस हो गई।
16. बिल गेट्स हर सेकेंड में करीब 12,054 रूपए कमाते हैं यानि कि एक दिन में लगभग 102 करोड़ रूपए कमाते हैं।
17. अगर बिल गेट्स का अपना कोई देश होता तो पुरी दुनिया में वह देश 37वां सबसे अमीर देश होता।
18. बिल गेट्स अगर पूरी दुनिया में हर व्यक्ति को लगभग बराबर-बराबर रूपए बाटें तो हर एक के हिस्से में करीब 4,983 रूपए आएगें।
19. हमारे भारत के सबसे महंगे खिलाड़ी “Mahendra Singh Dhoni” हैं. अगर वह अपना पैसा बिलकुल खर्च करें तो उन्हें बिल गेट्स के बराबर पैसा इकट्टठा करने में 35,000 साल लग जाएगें।
20. बिल गेट्स पूरे अमेरिका का कर्जा सिर्फ दस साल में उतार सकते हैं।
21. यदि बिल गेट्स 6.5 करोड़ रुपए रोज खर्च करे तो भी अपनी पूरी संपत्ति को खर्च करने में इन्हें 218 साल लगेंगे।
22. अगर मौजूदा संपत्ति के हिसाब से आकलन करें तो Bill gates जब तक जीवित रहेंगे प्रति सेकंड 7 हजार रुपये कमाते रहेंगे. ऐसे में मजाक में कहा जाता है कि अगर बिल गेट्स अपना 100 डॉलर का जमीन पर गिर गया नोट उठाते हैं, तो वह उठाने में उन्हें जितना समय लगेगा, उतने में वह उससे ज्यादा रकम कमा लेते हैं.
23. गेट्स अपनी लाइफ में 100 मिलियन डाॅलर (63170 Crore) दान करना चाहते है।
24. बिल गेट्स के दो बेटियां और एक बेटा है। हर बच्चे को माता पिता से केवल 10 मिलियन डॉलर मिलेंगे जबकि उनकी संपत्ति 72 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा है।
25. गेट्स हर साल 6.4 करोड़ रूपए प्राॅपर्टी टैक्स के रूप में अदा करते है। जबकि अपने अक्षय कुमार 18 करोड़ रूपए TAX भरते है।
26. इनके के दिल में भारत के लिए विशेष स्थान है. वह यहां गरीबों के पुनरुत्थान के लिए चलाए जा रहे फाउंडेशन के कार्यक्रमों को देखने हर साल आते हैं.
27. बिल गेट्स आज भी खाना खाकर अपनी प्लेट खुद ही साफ करते है। वे कहते है कि मुझे ये अच्छा लगता है।


Friday, 23 December 2016

मेरी कविता "काला धन"

 

Friday, 11 November 2016

सादा जीवन और उच्च विचार

सादगी सभ्यता का चिह्न है। संसार के सभी भले आदमियों ने सदा ' सादा जीवन और उच्च विचार ' की नीति को अपनाया है। सात्विक प्रकृति के लोग यही पसंद करते हैं कि वे साधारण सभ्य नागरिक की भांति सीधा-सादा जीवन व्यतीत करें। इस सरलता में ही उनकी श्रेष्ठता छिपी रहती है। जानने वाले जानते हैं कि श्रेष्ठ व्यक्ति अपनी श्रेष्ठता का परिचय दिखावटी आचार-व्यवहार से नहीं वें सादगी से ही देते हैं



सादगी के लिए सहिष्णुता का होना बहुत आवश्यक है। हम सहन शील बनें और प्रकृति की प्रतिकूलताएँ एवं मनुष्य की प्रतिकूल भावनाओं को शांतिपूर्वक सहन करने की आदत डालें , तभी हम संसार में सुखपूर्वक जीवन का निर्वाह कर सकते हैं। धर्म कर्त्तव्यों की मर्यादा तोड़ने वाले कुमार्गगामी मनुष्य की गतिविधियों को रोकने के लिए , उन्हें दंड देने के लिए समाज और शासन की ओर से जो प्रतिरोधात्मक व्यवस्था हुयी है , उससे सर्वथा बचे रहना सम्भव नहीं। धूर्तता के बल पर आज कितने ही अपराधी-प्रवृत्ति के लोग सामाजिक भर्त्सना से ओर कानूनी दंड से बच निकलने में सफल होते रहते हैं। पर यह चाल सदा सफल होती रहेगी , ऐसी बात नहीं है।

असत्य का आवरण अंतत: फटता ही है ओर अनीति अपनाने वाले के सामने न सही पीछे उसकी निंदा होती ही है। नागरिक कर्त्तव्यों का पालन भी सादगी का ही रूप है। जीवन में बड़ी-बड़ी सफलताओं , संभावनाओं एवं उपलब्धियों का आधार हमारे जीवन जीने के तरीकों पर निर्भर है। हम कैसे चलते हैं, उठते हैं , सार्वजनिक जीवन की आवश्यक बातों का कितना ध्यान रखते हैं, इसी पर हमारे जीवन का निर्माण होता है। किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए इन व्याहारिक बातों में सफल होना आवश्यक है। जो अपने व्यवहार में इन बातों का ध्यान नहीं रखते, दूसरों के हित-अनहित का विचार नहीं करते, स्वेच्छाचार अपनाते हैं , वे समाजद्रोही कहलाते हैं।

नम्रता नैतिक और आध्यात्मिक क्षेत्र की वह भावना है, जो सब मनुष्यों में , सब प्राणियों में स्थित शाश्वत सत्य से , ईश्वर से सम्बन्ध कराती है। इस तरह उसे जीवन के ठीक-ठीक लक्ष्य कि प्राप्ति कराती है। जगत में उस शाश्वत चेतना का , ईश्वर का दर्शन कर , मनुष्य का मस्तक श्रद्धा से झुक जाता है। श्रम ही सादगी की सबसे बड़ी पहचान है। श्रम से हट कर लोग अपने को महान घोषित करना चाहते हैं , यह उनका भ्रम ही है। उद्यमशील व्यक्तियों का मुख-मंडल सदैव चमकता हुवा दिखाई देता है और अकर्मण्य व्यक्ति सदैव क्लांत , उद्विग्न, दुखी और खोटी कल्पनाओं में फंसे देखे जा सकते हैं। परिश्रमी ही सबसे अधिक सुखी, प्रसन्न और संतुष्ट रहते हैं। वे भले ही भौतिक सम्पत्ति, समृद्धि में बड़े न हों, किन्तु उनका आंतरिक धन , जिससे मानसिक संतोष, हल्कापन और प्रसन्नता का वे अनुभव करते हैं, यह संसार की सबसे बड़ी सम्पत्ति है।

परिश्रम से ही स्वास्थ्य में सुधार होता है। उद्यमी व्यक्ति थककर अपनी शैया में प्रवेश करता है और उसे स्वास्थ्यपूर्वक उत्तम नींद आती है। प्रात:काल उठने पर वे तरोताजगी, प्रफुल्लता, शक्ति, प्रसन्नता आदि का अनभव करते हैं। आलसी, अकर्मण्य ही दुस्वप्नों एवं अनिद्रा पड़े हुवे सुबह भी आलस्य, चिंता और भारीपन-सा अनुभव करते हैं। वास्तव में सादगी एक सच्चाई है और उससे व्यक्ति अपने शरीर पर कम ध्यान देता है , अपितु उसका ध्यान मन को संवारने में ही लगा रहता है।